बुधवार, 3 मार्च 2010

मैं तुम्हे आदाब भी नहीं कहूंगा क्योंकि इतनी अदब नहीं है मुझमें

लोगों के चहेते चेहरों और नक़ाब-पोशों,

मैं तुम्हे आदाब भी नहीं कहूंगा क्योंकि इतनी अदब नहीं है मुझमें…

लोग कहते हैं कि तुम बहुत ताक़तवर हो, तुमने जहां बनाया, आसमान बनाया, पेड़-पौधे बनाये, जीव-जन्तु बनाये, चांद-सितारे बनाये, इंसान बनाया!! कुल मिलाकर सब कुछ तुम्ही ने बनाया है. तुम चाहो तो किसी को भिखारी बना सकते हो, चाहो तो किसी को राजा बना सकते हो. तुम ना चाहो तो हवायें चलनी बंद हो जाये, सूरज निकलना बंद हो जाये, प्रलय आ जाये और ना जाने क्या-क्या…

अगर तुम हो भी, और तुममे ऐसी ताक़त है तो मैं तुम्हे चैलेंज करता हूं. मैं हर मिनट तुम्हे गरियाऊंगा. जो उखाड़ना होगा-उखाड़ लेना. तुम से मेरा मतलब तुम सभी से है. चाहे वो कपटी राम का हुलिया हो, या जल्लाद अल्लाह का. चाहे वो चमचे इन्द्र की सूरत हो या पैग़म्बर मोहम्मद की. चाहे वो नपुंसक जीसस की बात हो या कमीने कृष्ण की.

मैं गरियाऊंगा, गरियाता हू, और गरियाता रहूंगा!!

तब तक, जब तक या तो तुम लोगों के दिमाग से नहीं भाग जाते, या मैं मर नहीं जाता.
भाग जाओ!!

2 comments:

  1. bahut achha likha hai...but
    mar nahi jata ka kya matlab hua?
    marne ke baad bhi hamari kranti chalti rahegi...kyunki ye ladai akele tumhari ya meri nahi hai.... samjhe janab

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  2. kyaa baat hai. mai iska print le raha hun
    aaj sham ki baitak me logon ko padhaunga.
    aur bataunga ki mera ek dost kitana himati hai.

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं