
बहुत लोगों ने डराया. समझाया. बतलाया . सलाह दिये. भगवान के घर देर है अंधेर नहीं. अभी भी पूजा-पाठ शुरु कर दो. वो बहुत दयालू है. मुआफ़ कर देगा. सुबह दो अगरबत्ती उनके नाम से जला दिया करो. मैनें सोचा – अगरबत्ती तो अभी भी जलाता हूं. वो बात और है कि मेरे घर इस बत्ती की भूमिका शौचालय को सुगंधित करने की होती है. शुभचिंतको ने बात आगे बढायी - अभी जिद करते हो. जब उमर बढेगी और अकल आयेगी तब रोना-धोना करोगे. तब पछताने से बढिया है कि अब पूजा-पाठ शुरु कर दो. हिन्दु हो. थोड़ा तो मान रखो.
कुछ लोगों ने कहा, अरे अल्लाह-इश्वर सभी तो एक ही हैं. बस उनको याद करो. पूजा-पाठ ना भी करो पर उनकी इज्ज़त तो करो. जहन्नुम से बचोगे. स्वर्ग की प्राप्ति होगी. सुधर जाओ. इन सजेशन बांटने वालों में से एक मेरी मां भी थी. बिचारी बहुत डरती है कि कल को उसका भगवान मेरे साथ क्या सलूक करेगा.
मैं भी सोचने लगा. और सोचा. बहुत देर तलक सोचा. झिझका, हिचका, और फिर निष्कर्ष पर पहुंच गया. बोला – जहन्नुम की जय हो. वैसे जन्नत में जाकर भी क्या जहां पसन्द के लोग मिले ही नहीं. अगर भगवान को गरियाने से या उसे ना मानने से नरक ही मिलनी है. तब तो नरक मे मेरे चहेते लोग बैठे होंगे.
सादत हसन मंटो, भगत सिंह, लेनिन, फ़्रेड्रिक नीशे, अल्बर्ट कामो, सलमान रुश्दी, राहुल सांस्कृत्यायन, हुसैन साहब, तसलीमा नसरीन, कमलेश्वर, मिर्ज़ा ग़ालिब… और ना जाने कौन-कौन!! सब तो जहन्नम में ही मिलेंगे. और तो और मेरे ढेर सारे दोस्त भी वहां मिलेंगे. मेरे प्रिय खुशवंत जी को भी क़ायदे से वहीं होना चाहिये.
जन्नत में जाकर ही क्या होगा – वहां मोदी का भाषण और मौलवियों का फ़तवा सुनके पक जाऊंगा. ठाकरे पता नहीं जन्नत का क्या हश्र करेगा. वहां भी कहीं मराठा प्रांत ना बना ले. और तो और वहां मेरा सबसे बड़ा दुश्मन ए. सूर्यप्रकाश भी होगा जो हुसैन साहब की पेंटिंग के पीछे पगले हिंदुओं को भड़काने में लगा हुआ है.
तो फिर घंटा से फिकर…. भाड़ में जाये राम-नाम… और झक मारे जन्नत
अपन को जह्न्नम ही चाहिये… “जह्न्नम की जय हो”
सादत हसन मंटो, भगत सिंह, लेनिन, फ़्रेड्रिक नीशे, अल्बर्ट कामो, सलमान रुश्दी, राहुल सांस्कृत्यायन, हुसैन साहब, तसलीमा नसरीन, कमलेश्वर, मिर्ज़ा ग़ालिब… और ना जाने कौन-कौन!! सब तो जहन्नम में ही मिलेंगे. और तो और मेरे ढेर सारे दोस्त भी वहां मिलेंगे. मेरे प्रिय खुशवंत जी को भी क़ायदे से वहीं होना चाहिये.nice
प्रत्युत्तर देंहटाएंभाड़ में जाए जन्नत ...हम तो जहन्नुम में ही खुश रह लेंगे ...
प्रत्युत्तर देंहटाएंशानदार व्यंग्य ...!!
जह्न्नम की जय हो
प्रत्युत्तर देंहटाएंजहन्नुम की जय हो सही फरमाया है दोस्त आपने , इस उबिस्तान को छोड़कर जब आनंदिस्तान के पथ पर अग्रसर होने की बात आती है तो महान लोग अक्सर जहन्नुम ही जाना चाहते है|आशा है आपके और भी कई दोस्त वही मिलेंगे |वाकई खूब लिखा है आपने आपके इस व्यग्यात्मक प्रस्तुति से मन आहलादित,अनुप्राणित , और पुष्पित हो उठा |
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपका अनुज
सचदेव
rahul...mai bhi wahin hongi na...sahi baat hai humlog jahannum mein baith kar gappe maarenge, khoob hullad machayenge aur to aur tum mujhe teen patti bhi sikha dena...khoob milega rang jab mil baithenge hum sab yaar
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut khoob...great
धर्म के जानकार लोगों से माफी सहित ....
प्रत्युत्तर देंहटाएंधर्म के बारे में लिखने ..एवं ..टिप्पणी करने बाले.. तोता-रटंत.. के बारे में यह पोस्ट ....मेरा कॉमन कमेन्ट है....
http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_27.html
Par maiN aapko जहन्नुम me nahiN miluNga. KyoNki maine apna जहन्नुम yahiN bana liya hai. Vaise bhi us जहन्नुम ka kya bharosa, hai bhi sahi ki nahin :)
प्रत्युत्तर देंहटाएंसही लिखा है राहुल आपने......
प्रत्युत्तर देंहटाएंअगर स्वर्ग है और वहां जाने की बारी आई तब तो वही लोग जाएंगे जिन्होंने आज के समय में अपने अपने भगवान को कंधा दिया हुआ है.
हम जसे तो तब वहीं जाएंगे जहां हमारे वरिष्ठ होंगे.
"भाड़ में जाये राम-नाम… और झक मारे जन्नत"
प्रत्युत्तर देंहटाएंबिटवा हम जान गईल बा. इन मुल्लन से डर तोहे बी लगत बा. इहाँ जो तूं राम-नाम को भाड में भेज रहल बा, ता उकरे झक मारने में "अल्लाह" काहे नहीं लिख दिया. तोहे अच्छे से पता बा कि अगर अल्लाह देईल तो ई ससुरे सारे मुल्ला लोग तोहे दौडा दौडा के मारब..इही लिए तूं "झक मारे अल्लाह" न लिखके "झक मारे जन्नत" लिख के होशियारी कर गईल. बहुत अच्छे बबुआ. बहुते समझदार आदमी हो.
चौबे दा को प्रणाम,
प्रत्युत्तर देंहटाएंपहिले ई बात साफ़ कर देइल जायी कि हमार केकरो से डर ना होबे. तु अपन भरम दूर करे कि खातिर हमर पुरान पोस्ट पढ ला. तोहर दिमाग के कीड़ा शांत हो जायी. तोहरा खातिर हम यहां लिंक भी देयी रहल हूं.
उम्मीद बा कि ई पढी लेय के बाद सब भरम खतम हो जायी.
http://noreligionxceptlove.blogspot.com/2010/03/blog-post.html
http://noreligionxceptlove.blogspot.com/2009/06/blog-post_17.html
http://noreligionxceptlove.blogspot.com/2009/04/blog-post.html
मैं भी जाना चाहता हूँ जहन्नुम में....मुझे ये स्वर्ग रास नहीं आता....दकियानूसी लोगों का स्वर्ग....
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